top of page
IMG_6318_edited.jpg

Get To Know Us

विगत कई वर्षो से मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों मे उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड इत्यादि उत्तरभारतीय राज्ये से बहुत लोग रोजीरोटी रोजगार के खोज मे आए और यही के होकर रह गए।

 शुरुआती दौर मे उन्होंने ये तो बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि वो लोग महाराष्ट्र मे ही रह जाएंगे परंतु महाराष्ट्र की मिट्टी मे मेहनत करते करते कब यही के होकर रह गए ये शायद उन्हे भी पता नहीं चला।

आज की परिस्थितियों मे उत्तर भारत के लोग जो महाराष्ट्र मे रहते है उसमे बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो अब यही का हो गया है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि 2,3 पीढ़ियों से वो यही रह रहे है।

महाराष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक उत्थान मे उत्तर भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है, बहुत कम समय मे  उन्होंने इस बात का एहसास जनमत को कराया है। भाजप की विचारधारा सबका साथ सबका

विकास के अंतर्गत  उत्तर भारतीय समाज का योगदान, उपलब्धियों को जनमानस तक पहुचाना, स्थानिक निवासियों के साथ सवांद बढ़ाना तथा उत्तर भारतीय समाज की समस्यायों को आवाज देने के हेतु

 से भाजपा महाराष्ट्र ने एक प्रकोष्ठ की स्थापना कि जिसको हम उत्तर भारतीय मोर्चा के रूप मे जानते है। उत्तर भारतीय मोर्चा (भाजपा महाराष्ट्र) की स्थापना से ही मोर्चा ने महाराष्ट्र मे रह रहे उत्तर भारतीयों को

 एकजुट करके समाज मे सकारात्मक योगदान के लिए प्रेरित किया। मोर्चा ने भाजपा और उत्तर भारतीय समाज में सवांद बढ़ाने का काम किया। महाराष्ट्र के युवा नेता भाई संजय पाण्डेयजी को मोर्चा का पदभार 2020 मे

 मिला और ये पूरी तरह से समाज को एकजुट करने मे लगे हुए है। महाराष्ट्र के युवा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फड़नवीस जी के नेतृत्व मे प्रधानमंत्री मोदी जी के संकल्प सबका साथ सबका विकास को पूरा

 करने के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने का संकल्प ही इस मोर्चा का उदेश्य है। श्री देवेन्द्र फड़नवीस जी के सरकार ने उत्तर भारतीय समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजकीय उत्थान के लिए

कई कदम उठाये, समाज ने देवेन्द्रजी को अपने बेटे के रूप में स्वीकारा और आज उनके नेतृत्व में अपनी कर्मभूमि के विकास के लिए जुटे हुए है। मोर्चा उत्तर भारतीय समाज के साथ सुख-दुःख में साथ खड़े रहने वाला

मंच है। उत्तर भारतीय समाज मुंबई शहर की रीढ़ की हड्डी है। आगे बढ़ने के लिए समाज के लोगों ने बड़ी मेहनत की है। इस समाज ने मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आज भी

अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहा है। इस योगदान में आ रही रूकावटो को दूर करना और समाज को एकजुट करने का काम मोर्चा शुरूवात से ही कर रहा है ।

Contact Us
ABOUT US: About Us

ABOUT US

Breaking Barriers, Opening Doors

vision-mission.jpeg
81-818191_person-clipart-speech-bubble-hd-png-download_edited_edited.jpg
mixkit-clenched-fist-raised-in-triumph-4

Vision & Mission

मोर्चा उत्तर भारतीय समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजकीय उत्थान के लिए कटिबद्ध है ।

President Message

आज महाराष्ट्र में और खासकर महाराष्ट्र बड़े शहरों मे जैसे मुंबई,पुणे,नागपूर इत्यादि शहरों मे बहुत लोग है

Our Ideology

उत्तर भारतीय मोर्चा वही विचारधारा का अनुयायी है जिस विचारधारा पर भारतीय जनता पार्टी आधारित है।

ABOUT US: Our Causes

Get Involved!

You Can Start Right Now

JOIN US
abtus_img.jpg

About the Morcha

विगत कई वर्षो से मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों मे उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड इत्यादि उत्तरभारतीय राज्ये से बहुत लोग रोजीरोटी रोजगार के खोज मे आए और यही के होकर रह गए।

शुरुआती दौर मे उन्होंने ये तो बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि वो लोग महाराष्ट्र मे ही रह जाएंगे परंतु महाराष्ट्र की मिट्टी मे मेहनत करते करते कब यही के होकर रह गए ये शायद उन्हे भी पता नहीं चला।

आज की परिस्थितियों मे उत्तर भारत के लोग जो महाराष्ट्र मे रहते है उसमे बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो अब यही का हो गया है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि 2,3 पीढ़ियों से वो यही रह रहे है।

महाराष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक उत्थान मे उत्तर भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है, बहुत कम समय मे उन्होंने इस बात का एहसास जनमत को कराया है। भाजप की विचारधारा सबका साथ सबका विकास के अंतर्गत उत्तर भारतीय समाज का योगदान, उपलब्धियों को जनमानस तक पहुचाना, स्थानिक निवासियों के साथ सवांद बढ़ाना तथा उत्तर भारतीय समाज की समस्यायों को आवाज देने के हेतु से भाजपा महाराष्ट्र ने एक प्रकोष्ठ की स्थापना कि जिसको हम उत्तर भारतीय मोर्चा के रूप मे जानते है। उत्तर भारतीय मोर्चा (भाजपा महाराष्ट्र) की स्थापना से ही मोर्चा ने महाराष्ट्र मे रह रहे उत्तर भारतीयों को एकजुट करके समाज मे सकारात्मक योगदान के लिए प्रेरित किया। मोर्चा ने भाजपा और उत्तर भारतीय समाज में सवांद बढ़ाने का काम किया। महाराष्ट्र के युवा नेता भाई संजय पाण्डेयजी को मोर्चा का पदभार 2020 मे मिला और ये पूरी तरह से समाज को एकजुट करने मे लगे हुए है। महाराष्ट्र के युवा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फड़नवीस जी के नेतृत्व मे प्रधानमंत्री मोदी जी के संकल्प सबका साथ सबका विकास को पूरा करने के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने का संकल्प ही इस मोर्चा का उदेश्य है। श्री देवेन्द्र फड़नवीस जी के सरकार ने उत्तर भारतीय समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजकीय उत्थान के लिए कई कदम उठाये, समाज ने देवेन्द्रजी को अपने बेटे के रूप में स्वीकारा और आज उनके नेतृत्व में अपनी कर्मभूमि के विकास के लिए जुटे हुए है। मोर्चा उत्तर भारतीय समाज के साथ सुख-दुःख में साथ खड़े रहने वाला मंच है। उत्तर भारतीय समाज मुंबई शहर की रीढ़ की हड्डी है। आगे बढ़ने के लिए समाज के लोगों ने बड़ी मेहनत की है। इस समाज ने मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आज भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहा है। इस योगदान में आ रही रूकावटो को दूर करना और समाज को एकजुट करने का काम मोर्चा शुरूवात से ही कर रहा है ।

810677-modi-vision-1.jpg

Vision and Mission

मोर्चा उत्तर भारतीय समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजकीय उत्थान के लिए कटिबद्ध है । जैसे शक्कर दूध में घुल कर उसे मीठा कर देती है, वैसे ही मोर्चा उत्तर भारतीय समाज की शक्ति को महाराष्ट्र के प्रगति में लगाने के लिये कार्यरत रहेगी।

हमारा लक्ष्य और सपना है कि महाराष्ट्र मे रह रहे हर उत्तरभारतीय को महाराष्ट्र के प्रगति के मुख्यधारा से जोड़ा जाए जिससे वो खुद को एक कड़ी के रूप मे महसूस कर सके और प्रगति का सहभागी बन सके। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, ऐसे मे ये जरूरी हो जाता है कि अगर देश को आगे ले जाना है तो महाराष्ट्र को और आगे जाना होगा हमारा विज़न और मिशन वही है जो पूर्व मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र को 1 ट्रिलिऑन डॉलर ईकॉनमी की बात थी। उसके लिए हमे हर समाज, वर्ग को जोड़कर उनके साथ चलना पड़ेगा तभी तो संभव हो पाएगा और इस लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी है कि सभी उत्तर भारतीय एक मंच पर आए और एक सकारात्मक माहौल मे चर्चा की जाए। यही एक मात्र तरीका है सबको जोड़ कर प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास के सपने को पूरा किया जाए । इस उद्देश को पूरा करने के लिये मोर्चा उत्तर भारतीय समाज का संघठन करते हुए राज्य के विकास के लिए कार्यरत है।

sanjaypandeysir.jpeg

President’s message

आज महाराष्ट्र में और खासकर महाराष्ट्र के शहरों मे जैसे मुंबई,पुणे,नागपूर इत्यादि शहरों मे बहुत लोग है जिनका जुड़ाव भारत के उत्तरी प्रदेशों से रहा है, और ये आबादी महाराष्ट्र के विकास मे अपना भरपूर योगदान दे रहा है । ये खुद ऊर्जा और विचारो से लबरेज है और यही शक्ति राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए ईंधन का कार्य कर रही है।

ये बात तय है कि उत्तर भारतीय समाज का बहुत ही बड़ा योगदान है महाराष्ट्र के विकास मे और मेरा मानना है कि इस समाज के उद्यमी, व्यापारी अब वापस समाज को दे रहे है। मै उत्तर भारतीय साथियो को आवाहन करता हूँ कि वो आगे आये और महाराष्ट्र के इस बदलाव में हमारा साथ और योगदान दे, ये हमारे उत्तर भारतीय समाज के साथियों का ही योगदान है जो मोर्चा इस सकारात्मक बदलाव का झंडा बुलंद किये हुए है। एक समय था की अपनी राजनीति चमकाने के लिये एक समाज को दुसरे से टकराया जाता था पर आज समय बद्दल गया है, महाराष्ट्र के युवा नेता पूर्व मुख्यमंत्री देवेद्रजी और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने “सबका साथ सबका विकास” का नारा देते हुए सरकार चलाकर ये दिखा दिया की समाज एक दुसरे के साथ कंधे से कंधे मिलाकर राज्य और देश का विकास कर सकते है। मोर्चा सभी समाज को एक साथ जोड़कर राज्य के विकास तथा उत्तर भारतीय समाज के उत्थान के लिए कटिबद्ध है । जब मैं समाज के लोगो से इस बारे में बात करता हूँ तो ये पाता चलता है कि, आज हमारे बहुत साथी है जो भाजपा के साथ विभिन्न स्तरों पर मिल कर काम करने के इच्छुक है। ये लोकतंत्र में सहभागिता द्वारा एक सहयोगी प्रक्रिया अपनाना चाहते है, इनकी यही बेताब ऊर्जा मेरे लिए प्रेरक शक्ति का काम करती है, हम इनकी इस ऊर्जा का स्वागत करते है और उसे स्वीकार करते है।

मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ की आप आगे आइए , हमारे साथ मिल कर काम कीजिए , और मै ये वादा करता हूँ कि हम एक दूसरे के सहयोग से एक नए और सकारात्मक महाराष्ट्र और साथ ही साथ भारत का निर्माण करने में सक्षम होंगे। चलिए एक ऐसा महाराष्ट्र बनाये जिसके माहौल, भाईचारा पर हम आप और हमारी आने वाली पीढ़िया गर्व महसूस करेंगी।

 जय महाराष्ट्र, जय भारत ।।

bjp-rally-1489226559.jpg

Our Ideology

उत्तर भारतीय मोर्चा वही विचारधारा का अनुयायी है जिस विचारधारा पर भारतीय जनता पार्टी आधारित है। और हम जानते है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सिद्धांतों और आदर्शों पर आधारित राजनीतिक दल है। यह किसी परिवार, जाति या वर्ग विशेष की पार्टी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ताओं को जोड़ने वाला सूत्र है--भारत के सांस्कृतिक मूल्य, हमारी निष्ठाएं और भारत के परम वैभव को प्राप्त करने का संकल्प; और साथ ही यह आत्मविश्वास कि अपने पुरुषार्थ से हम इन्हें प्राप्त करेंगे।

भाजपा की विचारधारा को एक पंक्ति में कहना हो तो वह है ‘भारत माता की जय’। भारत का अर्थ है ‘अपना देश’। देश जो हिमालय से कन्याकुमारी तक फैला है और जिसे प्रकृति ने एक अखंड भूभाग के रूप में हमें दिया है। यह हमारी माता है और हम सभी भारतवासी उसकी संतान हैं। एक मां की संतान होने के नाते सभी भारतवासी सहोदर यानि भाई-बहन हैं। भारत माता कहने से एक भूमि और एक जन के साथ हमारी एक संस्कृति का भी ध्यान बना रहता है। इस माता की जय में हमारा संकल्प घोषित होता है और परम वैभव में है मां की सभी संतानों का सुख और अपनी संस्कृति के आधार पर विश्व में शांति व सौंदर्य की स्थापना। यही है ‘भारत माता की जय’।

भाजपा के संविधान की धारा 3 के अनुसार एकात्म मानववाद हमारा मूल दर्शन है। यह दर्शन हमें मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का एकात्म यानि समग्र विचार करना सिखाता है। यह दर्शन मनुष्य और समाज के बीच कोई संघर्ष नहीं देखता, बल्कि मनुष्य के स्वाभाविक विकास-क्रम और उसकी चेतना के विस्तार से परिवार, गाँव, राज्य, देश और सृष्टि तक उसकी पूर्णता देखता है। यह दर्शन प्रकृति और मनुष्य में मां का संबंध देखता है, जिसमें प्रकृति को स्वस्थ बनाए रखते हुए अपनी आवश्यकता की चीज़ों का दोहन किया जाता है।

भाजपा के संविधान की धारा 4 में पांच निष्ठाएं वर्णित हैं। एकात्म मानववाद और ये पांचों निष्ठाएं हमारे वैचारिक अधिष्ठान का पूरा ताना- बाना बुनती हैं।

(1) राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकात्मता: हमारा मानना है कि भारत राष्ट्रों का समूह नहीं है, नवोदित राष्ट्र भी नहीं है, बल्कि यह सनातन राष्ट्र है। हिमालय से कन्याकुमारी तक प्रकृति द्वारा निर्धारित यह देश है। इस देश-भूमि को देशवासी माता मानते हैं । उनकी इस भावना का आधार प्राचीन संस्कृति और उससे मिले जीवनमूल्य हैं। हम इस विशाल देश की विविधता से परिचित हैं। विविधता इस देश की शोभा है और इन सबके बीच एक व्यापक एकात्मता है। यही विविधता और एकात्मता भारत की विशेषता है। हमारा राष्ट्रवाद सांस्कृतिक है केवल भौगोलिक नहीं। इसीलिए भारत भू-मंडल में अनेक राज्य है, पर संस्कृति ने राष्ट्र को बांधकर रखा, एकात्म रखा।

(2) लोकतंत्र: विश्व की प्राचीनतम ज्ञात पुस्तक ऋग्वेद का एक मंत्र ‘एकं सद विप्राः बहुधा वदन्ति उल्लेखनीय है। इसका अर्थ है, सत्य एक ही है। विद्वान इसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं। भारत के स्वभाव में यह बात आ गई है कि किसी एक के पास सच नहीं है। मैं जो कह रहा हूं वह भी सही है, आप जो कह रहे हैं वह भी सही है। विचार स्वातंत्र्य (फ्रीडम ऑफ थॉट्स एंड एक्सप्रेशन) का आधार यह मंत्र है।

संस्कृत में एक और मंत्र है- ‘वादे वादे जयते तत्त्व बोध:’ । इसका अर्थ है चर्चा से हम ठीक तत्त्व तक पहुँच जाते हैं। चर्चा से सत्य तक पहुंचने का यह मंत्र भारत में लोकतंत्रीय स्वभाव बनाता है। इन दोनों मन्त्रों ने भारत में लोकतंत्र का स्वरूप गढा-निखारा है। भारतीय समाज ने इसी लोकतंत्र का स्वभाव ग्रहण किया है। लोकतंत्र भारतीय समाज के अनुरूप व्यवस्था है। भाजपा ने अपने दल के अंदर भी लोकतंत्रीय व्यवस्था को मजबूती से अपनाया है। भाजपा संभवतः अकेला ऐसा राजनीतिक दल है, जो हर तीसरे साल स्थानीय समिति से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के नियमित चुनाव कराता है। यही वजह है कि चाय बेचने वाला युवक देश का प्रधानमंत्री बनता है और इसी तरह सभी प्रतिभावान लोगों का पार्टी के अलग-अलग स्तरों से लेकर चोटी तक पहुंचना संभव होता रहा है।

सत्ता का किसी एक जगह केन्द्रित होना लोकतंत्रीय स्वभाव के विपरीत है। इसीलिए लोकतंत्र विकेन्द्रित शासन व्यवस्था है। केन्द्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत सभी के काम और ज़िम्मेदारियां बटी हुई हैं। सब को अपनी-अपनी जिम्मेदारिया भारत के संविधान से प्राप्त होती हैं। संविधान द्वारा मिली अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सभी (केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत) स्वतंत्र हैं। इसीलिए गांव के लोग पंचायत द्वारा गांव का शासन स्वयं चलाते हैं । और यही इनके चढ़ते हुए क्रम तक होता है।

लोकतंत्र के प्रति हमारी निष्ठा आपातकाल में जगजाहिर हुई। 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल घोषित कर दिया था। नागरिकों के प्रकृति-प्रदत्त मौलिक अधिकार भी निरस्त कर दिए गए थे। यहां तक कि जीवन का अधिकार भी छीन लिया गया था। तत्कालीन जनसंघ ( आज की भाजपा) नेताओं को जेलों में डाल दिया गया था और पार्टी दफ्तरों पर सरकारी ताले डाल दिए गए थे। अखबारों पर भी सेंसरशिप लागू हो गई थी।

लोकतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा के कारण ही हम (यानि तत्कालीन जनसंघ के कार्यकर्ता) भूमिगत अहिंसक आंदोलन खड़ा कर सके। समाज को संगठित करके एक बड़ा संघर्ष किया। असंख्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस का दमन, जेल यातना और काम धंधे (रोजी-रोटी) का नुकसान सहा। इसी संघर्ष का परिणाम था 1977 के आम चुनावों में जनता जनार्दन की शक्ति सामने आई और इंदिरा जी की तानाशाह सरकार धराशाई हो गई।

(3) सामाजिक व आर्थिक विषयों पर गांधीवादी दृष्टिकोण; जिससे शोषणमुक्त और समतायुक्त समाज की स्थापना हो सके: गांधीवादी सामाजिक दृष्टिकोण भेदभाव और शोषण से मुक्त समतामूलक समाज की स्थापना है। दुर्भाग्य से एक समय में, जन्म के आधार पर छोटे या बड़े का निर्धारण होने लगा, अर्थात् जाति व्यवस्था विषैली होकर छुआछूत तक पहुंच गई। भूतकाल के पुरोधाओं से लेकर महात्मा गांधी व डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर को इससे समाज को मुक्त कराने के लिए संघर्ष करना पड़ा। आज भी यह विषमता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

यही वजह है कि अनुसूचित जाति के साथ अनेक प्रकार से भेदभाव होते हैं और उन्हें यह अहसास कराया जाता है कि वे बाकी जातियों से कमजोर हैं। शिक्षित और धनवान हो जाने से भी यह विषमता दूर नहीं होती। भारतीय संविधान के रचयिता डॉ अम्बेडकर ने विदेश से पीएचडी कर ली थी। फिर भी वह जिस कॉलेज में पढ़ाते थे वहां उनके पीने के पानी का घड़ा अलग रखा जाता था। भाजपा इसे स्वीकार नहीं करती। हम मानते हैं कि सभी में एक ही ईश्वर समान रूप से विराजते है। मनुष्य मात्र की समानता और गरिमा का यह दार्शनिक आधार है। देश को सामाजिक शोषण से मुक्त कराकर समृद्ध समाज बनाना हमारी आधारभूत निष्ठा है।

किसी एक राज्य या कुछ व्यक्तियों के हाथ में सत्ता के केन्द्रीकरण के अपने खतरे होते हैं और यह स्थिति सत्ता में भ्रष्टाचार को बढ़ाती है। लेकिन गांधीजी की मांगे सही साधनों पर भरोसा करने की भी थी। उन्होंने किसी ‘वाद’ को जन्म नहीं दिया, बल्कि उनके दृष्टिकोण जीवन के प्रति एकात्म प्रयास को उजागर करते हैं।

महात्मा गांधी के दृष्टिकोण के आधार पर भाजपा भी आर्थिक शोषण के खिलाफ है और साधनों के समुचित बंटवारे की पक्षधर है। हम इस बात पर विश्वास नहीं रखते कि कमाने वाला ही खाएगा। हमारी दृष्टि में कमा सकने वाला कमाएगा और जो जन्मा है वह खाएगा। हमारा मानना है कि समाज और राज्य सबकी चिन्ता करेंगे। पं.दीनदयालजी मनुष्य की मूल आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा और मकान के साथ शिक्षा और रोज़गार को भी जोड़ते थे। आर्थिक विषमताओं की बढ़ती खाई को पाटा जाना चाहिए। अशिक्षा, कुपोषण और बेरोज़गारी से एक बड़ा युद्ध लड़कर ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’’ का आदर्श प्राप्त करना हमारी मौलिक निष्ठा है। हमारे गांधीवादी दृष्टिकोण ने यह सिखाया है कि इसके लिए हमें विचार या तंत्र बाहर से आयात करने की ज़रूरत नहीं है। अपने सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर अपनी बुद्धि, प्रतिभा और पुरुषार्थ से हम इसे पा सकते हैं।

(4) सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता एवं सर्वपंथसमभाव: एक समय पश्चिमी देशों में पोप और पादरियों का राजकाज में अत्यधिक नियंत्रण हो गया था। अगर कोई अपराध करता था तो चर्च में एक निर्धारित राशि का भुगतान करके वह अपराधमुक्त होने का प्रमाण पत्र ले सकता था। नतीजा यह हुआ कि शासन में धर्म के असहनीय हस्तक्षेप का विरोध शुरू हो गया। विरोधियों का तर्क था कि धर्म घर के अंदर की वस्तु है। इस विरोध आन्दोलन से धर्मनिरपेक्षता का प्रादुर्भाव हुआ।

भारत में धर्म किसी पुस्तक, पैगम्बर या पूजा पद्धति में निहित नहीं है। हमारे यहाँ धर्म का अर्थ है जीवन शैली। अग्नि का धर्म है दाह करना और जल का धर्म है शीतलता। राजा को कैसे रहना और व्यवहार करना है यह है उसका राज-धर्म, पिता की क्या ज़िम्मेदारियां हैं, उसे क्या करना चाहिए, यह है पितृ-धर्म। इसी तरह पुत्र-धर्म और पत्नी-धर्म हैं। इसीलिए भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म से निरपेक्ष हो जाना नहीं है। भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सर्व पंथ समादर भाव है। शासक किसी पंथ को, किसी भी पूजा पद्धति को राज-पंथ, राज-धर्म को राज-पद्धति नहीं मानेगा। वह सभी धर्मों, पंथों एवं पद्यतियों को समान आदर देता है। हमारा उद्देश्य है, न्याय सबके लिए और तुष्टिकरण किसी का नहीं। इसका व्यावहारिक अर्थ है ‘सबका साथ सबका विकास’। हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि हिन्दओं को मुसलमानों से और मुसलमानों को हिन्दुओं से नहीं लड़ना है, बल्कि दोनों को मिल कर गरीबी से लड़ना है।

(5) मूल्य आधारित राजनीति: भाजपा ने जो पाचंवा अधिष्ठान अपनाया है वह है ‘मूल्य आधारित राजनीति’। एकात्म मानववाद मूल्य आधारित राजनीति पर विश्वास करता है। नियमों और मूल्यों के निर्धारण के वादे के बिना राजनीतिक गतिविधि सिर्फ निज स्वार्थपूर्ति का खेल है। भाजपा ‘मूल्य आधारित राजनीति’ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह सार्वजनिक जीवन का शुद्धिकरण एवं नैतिक मूल्यों की पुन:स्थापना उसका लक्ष्य है। आज देश का संकट मूल रूप से नैतिक संकट है और राजनीति विशुद्ध रूप से ताकत का खेल बन गई है। यही वजह है कि देश नैतिक ताकत के लुप्तिकरण से जूझ रहा है और मुश्किलों का सामना करने की अपनी क्षमता को खोता जा रहा है। जब हम इन पांचों निष्ठाओं की बात करते हैं तो अपने आसपास या देश में घटे कुछ ऐसे प्रसंग ध्यान में आते हैं, जिनसे लगता है कि हम हर स्तर पर पूरी तरह सभी निष्ठाओं का पालन करते हैं, यह नहीं कहा जा सकता। पर, हम यह विश्वास

से कह सकते हैं कि ये निष्ठाएं हमारे लिए प्रकाश-स्तम्भ की तरह हैं। हम सबको यह प्रयत्न करते रहना ज़रूरी है कि हम अपना जीवन और अपनी पार्टी को इन निष्ठाओं के आधार पर चलाएं।

Modi-Upadhyaya.jpg

Our Inspiration

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में उन्होंनें धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू कश्मीर की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि ''या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा''।

डॉ. मुखर्जी अपने संकल्प को पूरा करने के लिये 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। जेल में उनकी मृत्यु ने देश को हिलाकर रख दिया और परमिट सिस्टम समाप्त हो गया।उन्होंने कश्मीर को लेकर एक नारा दिया था, ''नहीं चलेगा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान''।

ABOUT US: Get Involved

Subscribe Form

Thanks for submitting!

  • Youtube
  • X
  • Facebook
  • Twitter

©2023 by   UTTAR BHARTIYA- MORCHA MAHARASHTRA. Proudly created by Rishikesh Pandey UBM (IT CELL HEAD)

Supported By Abhay, Chandrasen Tiwari.

bottom of page